एक सपना

कुछ नीली श्याही बोली थी
कुछ कलम ने खुद ही लिखा था
मे लिख-लिख के भी कुछ लिख ना सकी
जो बात तुम्हे बतानी थी

की मेरे उस छोटे से घर मे
एक छोटा सपना रहता है
खुद कभी मुझे मिलता नही
पर चोरी-चोरी कहता है

की एक दिन मुझे ले कर
वो नदी से यू बह जाएगा
कुछ धमक भी ना होगी
और सब यही रह जाएगा

फिर रो रो चाहे मे कितना रोकू
वो बिल्कुल बाज़ न आएगा
कुछ धमक भी ना होगी
और वो मुझे ले जाएगा

यही रह जाएगा मेरा सब कुछ
वो कलम किताब और श्याही
कुछ बचपन के टूटे खिलोने
वो आँगन का एकलौता झूला

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